Life's best friends विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गॄहेषु च। व्याधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मॄतस्य च॥
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जानिए धर्म के दस लक्षण - There are ten characteristics of 'Dharma' ~ सुभाषित संस्कृत श्लोक 15
There are ten characteristics of 'Dharma' धॄति: क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रह:। धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्ष...
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बुद्धि को कमल की पंखुड़ियो की तरह कैसे बढ़ाये...? सुभाषित संस्कृत श्लोक 14
How to expands intellect as the lotus petals expands यः पठति लिखति पश्यति, परिपृच्छति पंडितान् उपाश्रयति। तस्य दिवाकरकिरणैः नलिन...
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सम्पूरण सुभाषित संस्कृत श्लोक की सूचि - List of all Sanskrit Subhashitani shloka
संस्कृत सुभाषितानि (Sanskrit Subhashitani) सुभाषित (Subhashitani) का मतलब अच्छी बाते होता है। ये संस्कृत भाषा में लिखी बुद्धिमता...
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सभी धनों में श्रेष्ठ जिसे चोर भी नहीं चुरा सकता ~ सुभाषित संस्कृत श्लोक 08
न चोराहार्यम् न च राजहार्यम्, न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि। व्यये कृते वर्धत एव नित्यं, विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्॥
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जीवन के पहिये के दो पहलू ~ सुभाषित संस्कृत श्लोक 07
Two Stats in life wheel कस्यैकान्तं सुखम् उपनतं, दु:खम् एकान्ततो वा। नीचैर् गच्छति उपरि च, दशा चक्रनेमिक्रमेण |०७|
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सदाचरण से आप सब कुछ प्राप्त कर सकते है ~ सुभाषित संस्कृत श्लोक 06
आचारः परमो धर्म ,आचारः परमं तपः। आचारः परमं ज्ञानम्, आचरात् किं न साध्यते |०६|
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मनुष्य को कब सभी दिसाये समान लगती है ! - सुभाषित संस्कृत श्लोक 05
अकिञ्चनस्य दान्तस्य, शान्तस्य समचेतसः। मया सन्तुष्तमानसः , सर्वाः सुखमया दिशाः॥
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कब तक व्यक्ति की परिवार में पूछ होती हैं | Sanskrit Through of the day
यावद्वित्तोपार्जनसक्तः तावन्निजपरिवारो रक्तः । पश्चाज्जर्जरभूते देहे वार्तां कोऽपि न पृच्छति गेहे ॥ - भजगोविन्द स्तोत्र
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नियमित व्यायाम के फायदे | Benefit of Regular Exercise [Sanskrit Subhashitani Shlokas]
व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम् । आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम् ॥
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हमारी सनातन रीति कहती है || What our Eternal practices says...
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् , न ब्रूयात् सत्यमप्रियं। प्रियं च नानृतं ब्रूयात् , एष धर्मः सनातनः॥
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आठ गुण जो पुरुष को सुशोभीत करती हैं ~ Eight qualities that adorn a man
अष्टौ गुणा पुरुषं दीपयंति, प्रज्ञा सुशीलत्वदमौ श्रुतं च। पराक्रमश्चबहुभाषिता च, दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च॥
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पृथ्वी पर तीन रत्न - There are three gems on earth [Sanskrit Subhashitani Slokas]
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि, जलमन्नं सुभाषितम्। मूढैः पाषाणखण्डेषु, रत्नसंज्ञा विधीयते॥
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मूर्खों के पाँच लक्षण हैं - Five Signs of Fools [Sanskrit Subhashitani Shlokas]
Sanskrit Subhashitani Shlokas in Hindi मूर्खस्य पञ्च चिन्हानि गर्वो दुर्वचनं तथा। क्रोधश्च दृढवादश्च परवाक्येष्वनादरः॥
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तीनों चीजे जिन्हें सम्पूर्ण रूप से समाप्त कर देना चाहिए || Sanskrit Subhashitani Shlokas
Sanskrit Subhashitani Shlokas in Hindi अग्निशेषमृणशेषं शत्रुशेषं तथैव च | पुन: पुन: प्रवर्धेत तस्माच्शेषं न कारयेत् ||
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लक्ष्य की प्राप्ति || Goal Achievement | Sanskrit Shloka
Incredible Sanskrit Shlokas गच्छन् पिपिलिको याति योजनानां शतान्यपि । अगच्छन् वैनतेयः पदमेकं न गच्छति ॥
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न कोई किसी का मित्र है || No one's friends | Sanskrit Shloka
Incredible Sanskrit Shlokas कश्चित् कस्यचिन्मित्रं, न कश्चित् कस्यचित् रिपु:। अर्थतस्तु निबध्यन्ते, मित्राणि रिपवस्तथा ॥
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