Veeron Ka Ho Kaisa Basant – a Poem by Subhadra Kumari Chauhan आ रही हिमालय से पुकार है उदधि गरजता बार बार प्राची पश्चिम भू नभ अप...
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ठुकरा दो या प्यार करो ~ सुभद्राकुमारी चौहान प्रसिद्ध रचना
'Thukra Do Ya Pyar Karo' – a Poem by Subhadra Kumari Chauhan देव! तुम्हारे कई उपासक कई ढंग से आते हैं सेवा में बहुमू...
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जलियाँवाला बाग में बसंत
यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते, काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते। कलियाँ भी अधखिली, मिली हैं कंटक-कुल से, ...
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झांसी की रानी - सुभद्राकुमारी चौहान
Jhansi ki Rani Poem by Subhadra kumari Chauhan सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवा...
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खिलौनेवाला ~ सुभद्राकुमारी चौहान प्रसिद्ध रचना
Khilone Wala Poem - Subhadra Kumari Chauhan वह देखो माँ आज खिलौनेवाला फिर से आया है। कई तरह के सुंदर-सुंदर नए खिलौने लाय...
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